
टोप़रक-कला उज्बेकिस्तान के करताउ पर्वत में स्थित एक प्राचीन शहर है। इसे पहली बार 4वीं सदी ईसा पूर्व में सोग्ड के शासकों द्वारा बनाया गया और बाद में खानाबदोश साम्राज्य कुशानों द्वारा विकसित किया गया। बाद में यह फ़ारसी सस्सानी द्वारा जीता गया और 8वीं सदी में सामानी साम्राज्य का आधिकारिक शहर बना। पुरातात्विक खुदाई में ईरानी, यूनानी और हेलेनिस्टिक प्रभाव वाली विभिन्न पोशाक की वस्तुएँ मिली हैं। स्थल की अनूठी विशेषता इसके केंद्र में स्थित बड़े किले की है, जिसे मोटी दीवार से घेरा गया है। किले में अच्छी तरह संरक्षित मंदिर, महल और अन्य ढाँचे शामिल हैं, जिनमें 4वीं सदी ईसा पूर्व का एक प्रभावशाली क़िला भी है। परिसर में एक तीन-कक्षीय मंदिर है जिसकी दीवारों पर बहुरंगी टाइलें लगी हैं। यहाँ का एक प्राचीन अग्निमंदिर अब संग्रहालय के रूप में कार्यरत है। आगंतुकों को मिट्टी के मॉडलिंग की स्थानीय परंपरा को दर्शाती टेराकोटा मूर्तियों का संग्रह भी देखने को मिलेगा।
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