
कुरमा के बुर्जदार पुराने शहर में स्थित बौद्ध स्तूप, अमूर नदी घाटी पर राज करता है। यह उस कोंगा गाँव का अद्भुत हिस्सा है जहाँ रूस चीनी सीमा से मिलता है। 18वीं शताब्दी का यह स्तूप लामा अनुजंग और उनके पिता, संगत्सम द्वारा निर्मित है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के क्षेत्रीय नेता थे। यह संरचना एक चीनी या तिब्बती बौद्ध मंदिर की तरह है, जिसमें चार-स्तरीय वेदी और गुंबद वाला शीर्ष प्रमुख है। इसे लाल और सफेद बलुआ पत्थर से बनाया गया है, और इसकी संरचना चार स्तंभों द्वारा समर्थित है। अन्य रंगीन मंदिरों से अलग, यह संतुलित अंधेरा और सफेद प्रकाश वाली संरचना नीले आकाश के खिलाफ एक जीवंत विपरीतता उत्पन्न करती है। स्तूप में आगंतुकों को प्राचीन तिब्बती विद्वानों को ध्यान या प्रार्थना करते देखना मिलता है। यह शांति के क्षण के साथ पारंपरिक मंगोलियन-बौद्ध प्रेरित वास्तुकला का अनुभव करने का एक बेहतरीन स्थल है। फोटोग्राफरों और यात्रियों के लिए, इस दृश्य को कैप्चर करना एक अनूठी, खूबसूरत याद जरूर बनाता है।
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